ईमानदारी
कोई कितना भी भ्रष्ट हो, मिलावटखोर हो, कितना भी कामचोर हो पर उसे ईमानदारी, सत्य ही अच्छा क्यों लगता है, लगता है यही प्राकृतिक गुण हैं जो हम जन्मजात लेकर इस दुनिया में लेकर आये थे, बाकी तो सब इस दुनिया में ही आ कर सीखते हैं, क्यों दोस्तों जरा मनन करे और बतायें, क्या यह सत्य है?
कोई कितना भी भ्रष्ट हो, मिलावटखोर हो, कितना भी कामचोर हो पर उसे ईमानदारी, सत्य ही अच्छा क्यों लगता है, लगता है यही प्राकृतिक गुण हैं जो हम जन्मजात लेकर इस दुनिया में लेकर आये थे, बाकी तो सब इस दुनिया में ही आ कर सीखते हैं, क्यों दोस्तों जरा मनन करे और बतायें, क्या यह सत्य है?
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