Friday, May 11, 2018

मयूरासन

मयूर का अर्थ होता है मोर। इस आसन करने से शरीर की आकृति मोर की तरह दिखाई देती है, इसलिए इसका नाम मयूरासन है। इस आसन को बैठकर सावधानीपूर्वक किया जाता है। इस आसन में शरीर का पूरा भार हाथों पर टिका होता है और शरीर हवा में लहराता है।

#दोनों हाथों को दोनों घुटने के बीच रखें। हाथ के अँगूठे और अँगुलियाँ अंदर की ओर रखते हुए हथेली जमीन पर रखें। फिर दोनों हाथ की कोहनियों को नाभि केंद्र के दाएँ-बाएँ अच्छे से जमा लें। पैर उठाते समय दोनों हाथों पर बराबर वजन देकर धीरे-धीरे पैरों को उठाएँ।

हाथ के पंजे और कोहनियों के बल पर धीरे-धीरे सामने की ओर झुकते हुए शरीर को आगे झुकाने के बाद पैरों को धीरे-धीरे सीधा कर दें। पुन: सामान्य स्थिति में आने के लिए पहले पैरों को १जमीन पर ले आएँ और तब पुन: वज्रासन की स्थिति में आ जाएँ।

#जमीन पर पेट के बल लेट जाइए। दोनों पैरों के पंजों को आपस में मिलाइए। दोनों घुटनों के बीच एक हाथ का अंतर रखते हुए दोनों पैरों की एड़ियों को मिलाकर गुदा को एड़ी पर रखिए। फिर दोनों हाथों को घुटनों के अंदर रखिए ताकि दोनों हाथों के बीच चार अंगुल की दूरी रहे। दोनों कोहनियों को आपस में मिला कर नाभि पर ले जाइए। अब पूरे शरीर का वजन कोहनियों पर दें कर घुटनों और पैरों को जमीन से उठाये रखिए। सिर को सीधा रखिए।

#मयूरासन खुली हवादार जगह में करना चाहिए। इसके लिए आप सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं और आगे की ओर झुके।

#आगे झुकते हुए दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर नाभि पर लगाकर जमीन पर सटा लें। इसके बाद अपना संतुलन बनाते हुए घुटनों को धीरे-धीरे सीधा करने की कोशिश करें। अब आपका शरीर पूरी सीध में है और सिर्फ आपके हाथ जमीन से सटे हुए हैं।

#इस आसन को करने के लिए शरीर का संतुलन बनाए रखना जरूरी है जो कि पहली बार में संभव नहीं। यदि आप रोजाना मयूर आसन का अभ्यास करेंगे तो आप निश्चित तौर पर आसानी से इसे कर पाएंगे।

मयूरासन के लाभ

#आमतौर पर #मयूरासन से #गुर्दे, #अग्नाश्य और #आमाशय के साथ ही #यकृत इत्यादि को बहुत लाभ होता है।
#यह आसन #फेफड़ों के लिए बहुत उपयोगी है।इस आसन से #वक्षस्थल, #फेफड़े, #पसलियाँ और #प्लीहा को शक्ति प्राप्त होती है।

#तिल्ली, यकृत, गुर्दे, अग्न्याशय एवं आमाशय सभी लाभान्वित होते है।

#मधुमेह के रोगियों के लिए भी यह आसन लाभकारी है। इस आसन से क्लोम ग्रंथि पर दबाव पड़ने के कारण मधुमेह के रोगियों को भी लाभ मिलता है। इस आसन का अभ्यास करने वालों को मधुमेह रोग नहीं होता। यदि यह हो भी जाए तो दूर हो जाता है।

#चेहरे पर चमक लाने के लिए मयूरासन करना चाहिए। यह आसन चेहरे पर लाली प्रदान करता है तथा उसे सुंदर बनाता है।

#यह आसन शरीर में रक्त संचार को नियमित करता है।

#यह आसन पेट के रोगों जैसे-अफारा, पेट दर्द, कब्ज, वायु विकार और अपच को दूर करता है।

#यह आसन भुजाओं और हाथों को बलवान बनाता है।

#मयूरासन करने से हाथ, पैर व कंधे की मांसपेशियों में मजबूती आती है।

#यदि आपको आंखों संबंधी कोई समस्या है तो उसका निदान भी मयूरासन से किया जा सकता है।

#पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए मयूरासन करना चाहिए। यदि आपको पेट संबंधी समस्याएं जैसे गैस बनना, पेट में दर्द रहना, पेट साफ ना होना इत्यादि होता है तो आपको मयूरासन करना चाहिए। पाचन क्रिया सुचारु रूप से कार्य करती है।

#कब्ज‍ियत, गैस आदि पेट से संबंधित सामान्य रोगों का निदान होता है। जिन लोगों को बहुत अधिक कब्ज रहती है उनके लिए मयूरासन से बढ़िया कोई उपाय नहीं। जठराग्नि को प्रदीप्त करता है।

#सामान्य रोगों के अलावा मयूर आसन से आंतों व अन्य अंगों को मजबूती मिलती है। आँतों एवं उससे संबंधित अंगों को मजबूती मिलती है एवं मयूरासन से आमाशय और मूत्राशय के दोषों से मुक्ति मिलती है।

#यह आसन गर्दन और मेरुदंड के लिए भी लाभदायक है।

#जिन लोगों को ब्लडप्रेशर, टीबी, हृदय रोग, अल्सर और हर्निया रोग की शिकायत हो, वे यह आसन योग चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें।

#आमतौर पर मयूरासन उन लोगों को करने के लिए मना किया जाता है जो उच्चे रक्तचाप की समस्या से पीडि़त हैं।

#टी.बी यानी तपेदिक के मरीजों को भी मयूरासन नहीं करना चाहिए।

#हृदय रोग या हार्ट की बीमारियों से ग्रसित लोगों को भी मयूरासन नहीं करना चाहिए। अल्सर और हर्निया रोग से पीड़ित लोगों को भी मयूरासन करने से बचना      

Tuesday, May 8, 2018

बाबा रामदेव से जुड़े 10 प्रमुख तथ्य - योग के जरिए देश- दुनिया में दिलाई 'योग' को पहचान


'योग' पर चर्चा होते ही जो जेहन में सबसे पहला नाम बाबा रामदेव का आता है। इस नाम को भारत में ही नही बल्कि पूरी दुनिया में बखूबी जानते हैं। इन्होंने योग को पुरे विश्व में फैलाकर देश की पूरी दुनिया में अलग पहचान बनाई है। बाबा रामदेव का जन्म 12 दिसम्बर 1965 को हरियाणा जिले के महेन्द्रगढ़ जिले में नारनौल नामक गांव में हुआ था। इनका ब्रांड 'पातंजलि' जिस नाम से इन्होंने स्वदेशी उत्पादों का निर्माण शुरू किया, आज हर प्रकार के उत्पाद बनाती है। रामदेव जगह-जगह स्वयं जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, जिनमें हर सम्प्रदाय के लोग आते हैं। इन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान भी शुरू किया और कभी-कभी तीखे राजनीतिक बयान भी देते रहते हैं। आज हम योग गुरु रामदेव के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं । 


🔶 1875 में लिखी दयानंद सरस्वती की किताब ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का रामदेव पर गहरा असर पड़ा था। सरस्वती के इसी प्रभाव के कारण रामदेव कभी फोन पर हैलो नहीं कहते, इसके बजाय वह ओम कहते हैं। बाबा रामदेव के प्रेरणास्रोत रामप्रसाद बिस्मिल और सुभाष चंद्र बोस भी रहे हैं। इन्‍होंने हिमालय की कंदराओं में भी मेडिटेशन और स्‍व-अनुशासन का अभ्‍यास करते हुए काफी दिन बिताए हैं।

🔶 शुरुआती दिनों में रामदेव योग की छोटी-छोटी क्लासेस देते थे और कई जगह छोटे-छोटे कैंप लगाते थे जिनमें आने वाले लोगों की संख्या मात्र 30 से 40 हुआ करती थी, लेकिन योग से लोगों को फर्क पड़ने लगा तो बाबा ने इसकी फ़ीस रख डाली। लोग बताते हैं कि बाबा उस वक्त फ़ीस के एवज में 30 से 50 रुपया लिया करते थे। बाद में आस्‍था चैनल पर योगा के प्रोग्राम से इन्‍हें लोकप्रियता मिली।

🔶 बाबा रामदेव ने आज भी अपना बजाज कंपनी का 90 के दशक का स्कूटर संभाल कर रखा है। इस स्कूटर पर वह दवाइयां बेचते थे। यह उन्हें आज भी बहुत अजीज है।

🔶 बाबा रामदेव और पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण आपस में संस्कृत में बातें करते हैं। हालांकि आम जनता के सामने वे हिंदी में ही बोलते हैं।

🔶 रामदेव पूरी तरह से स्वदेशी अपनाने वालों में से हैं। इसकी सलाह वे अन्य लोगों को भी देते हैं। इसलिए वे आज भी महिंद्रा की स्कॉर्पियो से ही आना-जाना करते हैं। फोन भी वे माइक्रोमैक्स का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि वे भरी गर्मी में भी सोने के लिए AC का इस्‍तेमाल नहीं करते हैं।

🔶 बाबा रामदेव हमेशा फर्श पर ही सोते हैं। हालांकि उनके कमरे में एक वीडियोकॉन का टीवी और पढ़ाई की टेबल जरूर है, लेकिन वे सोने के लिए फर्श का इस्तेमाल करते हैं।

🔶 हर तरह के प्रोडक्‍ट लाने के बाद बाबा रामदेव अब जल्द ही तीन हजार तरह के कपड़ों की वैरायटी बाजार में उतारने वाले हैं।

🔶 बाबा रामदेव रोज 18 से 20 घंटे काम करते हैं। रोज सुबह 3 बजे जगकर ही एक्‍सरसाइज में लग जाते हैं। ये शाकाहारी है और अनाज बिलकुल नहीं खाते बल्कि हमेशा फ्रूट्स का सेवन करते है और जूस का भी अधिक से अधिक सेवन करते है।

🔶 बाबा रामदेव पश्चिमी पकवानों से बहुत ही घृणा करते है और सॉफ्ट ड्रिंक्‍स को टॉयलेट क्लीनर्स बताते है।

🔶 हालांकि बाबा आठवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ कर घर से चले गए थे और योग सीखने लगे थे पर इनके पास चार-चार यूनिवर्सिटीयों से मिली डॉक्‍टरेट की डिग्री है। उन्‍होंने एक बार कहा था कि होमोसेक्‍सुअलिटी एक मानसिक विकार है।